दिल और आँसूं ३

कुछ आंसूओं की बूंदें छुपानी थी उसे,
आसान ना था मेंहदीं लगी हाथों से आंसू को छूना,
दिल की धड़कनों के दरमयां सांसों की उठती गिरती लहरों ने जैसे इस काम को अंजाम दिया ही था,कि
बहते काजल ने चुगली सी कर दी।
क्यू मेकअप और मेंहदीं भी दिल के आंसूओं को छुपा ना सके थे शादी की उस रात में?
रात के अंधेरों का आज भी इंतजार करते हैं दिल के आंसू।
करवटों के दरमयां छूपाना आसां हो जाता है ना।।।
#शादीऔरदिलकेआंसू

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