अपने बच्चे को क्या बनाएं?
अपने बच्चे को क्या बनाएं?
*एक राज्य में एक राजा अपनी प्रजा के साथ रहता था, राजा का राज्य ऐश्वर्य, धन-धान्य से भरपूर था लेकिन फिर भी राज्य में हमेशा अशांति फैली रहती थी राजा राज्य में फैली अशान्ति से हमेशा परेशान रहता था !!*
*एक दिन राजा ने राज्य के सभी साधू-संतों की एक सभा बुलाई और सभी साधू-संतो से राज्य में फैली अशांति का उपाय पूछा, सभी-साधू संतो ने आपसी सहमती से राजा को एक उपाय बताया, साधू महात्मा ने बताया की अगर राजा अपने महल में दो बाज के बच्चों को पाले तो राज्य में फैली अशांति दूर हो सकती है साधुओं की बात मानकर राजा ने अपने सैनिकों को बाज के बच्चों को महल में लाने का आदेश दिया !!*
*बाज के दोनों बच्चों को पालने के लिए राजा ने एक आदमी को महल में नियुक्त कर दिया, कुछ समय बाद जब राजा को राज्य में फैली अशांति दूर होते हुए नहीं दिखी उसे बाज के उन दो बच्चों को देखने की इच्छा हुई राजा जब बाज के बच्चों को देखने गया तब तक बाज के वह बच्चे बड़े हो चुके थे, राजा ने बाज के बच्चों को पालने के लिए नियुक्त किए गए आदमी से कहा कि वह इन बच्चों को उड़ते हुए देखना चाहता है, राजा की बात सुनकर उस आदमी ने बाज के उन बच्चो को उडा दिया !!*
*राजा ने देखा कि बाज के उन बच्चों में से एक बच्चा तो काफी ऊपर तक उड़ रहा था, लैकिन दूसरा बाज थोड़ी देर आसमान में उड़ता और फिर आकर एक पेड़ पर बैठ जाता राजा ने बाज की देख-रेख में नियुक्त आदमी से इसका कारण पूछा तो उसने बताया किन यह बाज शुरू से ही ऐसा करता है कुछ देर उड़ने के बाद यह बाज आकर वापस पेड की इस डाल पर आकर बेठ जाता है और इस डाल को छोडता ही नहीं है अगले दिन राजा ने पुरे राज्य में ऐलान करवा दिया कि जो भी इस बाज को आसमान में दूर तक उड़ना सिखा देगा उसे मुह माँगा इनाम दिया जाएगा बाज को उड़ना सिखाने के लिए पुरे राज्य से कई सारे लोग आए लेकिन बाज का रवैया जो का त्यों रहा बाज कुछ देर आसमान में उड़ता और फिर आकर पेड की उसी डाल पर बेठ जाता !!*
*एक दिन राजा ने देखा की दूसरा बाज भी पहले बाज के साथ आसमान में ऊँचा उड़ रहा था, दोनों बाजों को आसमान में एक साथ उड़न भरते देख रजा बहुत खुश हुआ राजा ने अपने सैनिको को पता लगाने का आदेश दिया की किसने यह कारनामा कर दिखाया है !!*
*सैनिकों ने पता लगाया कि वह एक किसान है जिसने बाज को उड़ना सिखाया है राजा ने किसान को महल में उपस्थित होने का आदेश दिया,अगले दिन किसान राजा के महल में उपस्थित हुआ तो राजा ने पूछा की कैसे उसने उस बाज को उड़ना सिखा दिया !!*
*किसान ने बड़ी विनम्रता पूर्वक कहा, कि महाराज मैंने ध्यान दिया की बाज एक ही डाल के ऊपर आकर वापस बेठ जाता था इसलिए मैंने वह डाल ही काट दी जिस पर बाज बार-बार आकर वापस बेठ जाता था किसान की बात सुनकर राजा को अपने अपने राज्य की अशांति का कारण पता चल गया !!*
*तो कहानी का तर्क यही है, कि अपने अन्दर की बुरी आदत को पहचाने और उस डाल की तरह ही अपने अन्दर की कमी को काट कर फैक दें बाज ऐसा पक्षी जिसे हम ईगल भी कहते है, जिस उम्र में बाकी पंछियो के बच्चे चिचियाना सीखते है उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे में दबोच कर सबसे ऊँचा उड़ जाती है !!*
*मादा बाज अपने चूजे को लेकर लगभग १२ कि.मी. ऊपर ले जाती है जितने ऊपर आधुनिक जहाज उड़ा करते हैं और वह दूरी तय करने में मादा बाज ७ से ९ मिनट का समय लेती है यहाँ से शुरू होती है उस नन्हें चूजे की कठिन परीक्षा, उसे अब यहां बताया जाएगा कि तू किस लिए पैदा हुआ है ? तेरी दुनिया क्या है ? तेरी ऊंचाई क्या है ? तेरा धर्म बहुत ऊंचा है और फिर मादा बाज उसे अपने पंजों से छोड़ देती है !!*
*धरती की ओर ऊपर से नीचे आते वक्त लगभग २ कि.मी. उस चूजे को आभास ही नहीं होता कि उसके साथ क्या हो रहा है ७ कि.मी. के अंतराल के आने के बाद उस चूजे के पंख जो कंजाइन से जकड़े होते है, वह खुलने लगते है लगभग ९ कि.मी. आने के बाद उनके पंख पूरे खुल जाते है यह जीवन का पहला दौर होता है जब बाज का बच्चा पंख फड़फड़ाता है अब धरती से वह लगभग ३००० मीटर दूर है लेकिन अभी वह उड़ना नहीं सीख पाया है अब धरती के बिल्कुल करीब आता है जहाँ से वह देख सकता है उसके स्वामित्व को अब उसकी दूरी धरती से केवल ७००/८०० मीटर होती है लेकिन उसके पंख अभी इतने मजबूत नहीं हुए है की वो उड़ सके धरती से लगभग ४००/५०० मीटर दूरी पर उसे अब लगता है कि उसके जीवन की शायद अंतिम यात्रा है फिर अचानक से एक पंजा उसे आकर अपने कब्जे मे लेता है और अपने पंखों के दरमियान समा लेता है !!*
*यह पंजा उसकी माँ का होता है जो ठीक उसके उपर चिपक कर उड़ रही होती है और उसकी यह शिक्षा निरंतर चलती रहती है जब तक कि वह उड़ना नहीं सीख जाता यह शिक्षा एक कमाण्डो की तरह होती है तब जाकर दुनिया को एक बाज़ मिलता है जो अपने से दस गुना अधिक वजनी प्राणी का भी शिकार करता है !!*
*हिंदी में एक कहावत है बाज़ के बच्चे मुँडेर पर नही उड़ते बेशक अपने बच्चों को अपने से चिपका कर रखिए पर उसे दुनिया की मुश्किलों से परिचित कराइए, उन्हें लड़ना सिखाइए बिना आवश्यकता के भी संघर्ष करना सिखाइए !!*
*वर्तमान समय की अनन्त सुख सुविधाओं की आदत; अभिवावकों के बेहिसाब लाड़ प्यार ने मिलकर, आपके बच्चों को ब्रायलर मुर्गे जैसा बना दिया है जिसके पास मजबूत टंगड़ी तो है पर चल नही सकता, वजनदार पंख तो है पर उड़ नही सकता क्योंकि गमले के पौधे और जंगल के पौधे में बहुत फ़र्क होता है अपने बच्चों को मजबूत बनायें*।
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