मां @भीअभि
माँ,
घर में एक खामोशी सी छाई है,
जहाँ हंसी गूंजती थी, चिंताएँ आती थीं,
तेरे हाथों की छुअन से सब दूर हो जाती थीं,
एक प्यार का जाना,
एक वादे का छूट जाना,
मसालों की खुशबू, धीमी और मद्धम,
एक भूली हुई गर्मी, एक फीकी सी रौशनी।
तेरी मीठी चाय की भाप,
एक यादों का कोहरा,
धूप भरी सुबहों में, सुनहरे दिन।
मैं तुझे हर कमरे में ढूंढ रहा हूँ,
तेरे बातों की बची हुई खुशबू।
तेरी खाली कुर्सी,
एक खोखली जगह,
एक लगातार दर्द,
एक खाली स्थान।
खिला है पूरा बगीचा, गुलाब लाल हैं,
लेकिन खूबसूरती फीकी है,
मेरी रूह लहूलुहान है।
कोई कोमल हाथ नहीं मेरी बेल को सींचने के लिए,
कोई प्यार भरी नज़र मेरी नज़र से मिलने के लिए।
कहते हैं वक़्त दर्द भर देगा,
बारिश के बाद धूप आएगी।
लेकिन तेरी याद,
एक लगातार लहर,
एक प्यार इतना गहरा,
जो कमी है तेरी,
कभी नहीं भर पाएगी।
तो मेरे दिल में, तू हमेशा रहेगी,
मेरा राह दिखाता तारा,
एक माँ का अधूरा प्यार, एक अनमोल सा किनारा,
हमेशा के लिए मेरे दिल में उकेरा सा हुआ,
उभरा सा हुआ तेरी याद का बस एक सहारा।
@भीअभि
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