बच्चों के लिए 19 महत्वपूर्ण श्लोक, जिन्हें सीखना और उच्चारण करना आसान है 1
बच्चों के लिए 19 महत्वपूर्ण श्लोक, जिन्हें सीखना और उच्चारण करना आसान है
ये श्लोक न केवल उच्चारण में सरल हैं, बल्कि इनमें गहरे अर्थ भी छिपे हैं। ये जीवन के महत्वपूर्ण पाठ सिखाते हैं।
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1. गायत्री मंत्र
इसे महामंत्र या सावित्री मंत्र भी कहा जाता है। यह सूर्य को समर्पित सबसे प्रतिष्ठित मंत्र है। बच्चों को इसे सुबह सूरज के सामने उच्चारण करने के लिए प्रेरित करें।
श्लोक
ॐ भूर् भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्।
अर्थ
हे ईश्वर, आप जो सारे संसार के आधार हैं, जो स्वयं मौजूद हैं, दुखों से मुक्त करते हैं और ब्रह्मांड में सबको पोषित करते हैं, हमें शुद्ध बुद्धि और प्रेरणा दें।
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2. शांति मंत्र (सहना भवतु)
यह शिक्षक और छात्र को एकता के सूत्र में बांधने के लिए उपयुक्त प्रार्थना है।
श्लोक
ॐ सह नाववतु, सह नौ भुनक्तु
सहवीर्यं करवावहै
तेजस्विनावधीतमस्तु
मा विद्विषावहै।
ॐ शांति: शांति: शांति:।
अर्थ
हे ईश्वर, शिक्षक और छात्र की रक्षा करें, उन्हें पोषण दें। हम एक साथ पढ़ें और कोई द्वेष न हो।
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3. शांति मंत्र (सर्वे भवन्तु सुखिनः)
यह श्लोक सबके लिए शांति, समृद्धि और सुख की कामना करता है।
श्लोक
ॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु
सर्वेषां शांतिर्भवतु
सर्वेषां पूर्णं भवतु
सर्वेषां मंगलं भवतु।
सर्वे भवन्तु सुखिनः
सर्वे सन्तु निरामयाः।
अर्थ
सभी के लिए शुभ हो, शांति हो, और कोई दुखी न हो।
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4. शांति मंत्र (असतो मा सद्गमय)
यह मंत्र सत्य और ज्ञान की ओर ले जाने की प्रार्थना है।
श्लोक
असतो मा सद्गमय
तमसो मा ज्योतिर्गमय
मृत्योर्मा अमृतं गमय।
ॐ शांति: शांति: शांति:।
अर्थ
हे ईश्वर, हमें असत्य से सत्य, अंधकार से प्रकाश और मृत्यु से अमरता की ओर ले चलें।
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5. पूर्ण मंत्र
यह श्लोक परम सत्य और ब्रह्म की व्याख्या करता है।
श्लोक
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम्
पूर्णात् पूर्णमुदच्यते
पूर्णस्य पूर्णमादाय
पूर्णमेवावशिष्यते।
अर्थ
यह ब्रह्म सत्य और पूर्ण है। इससे कोई भी अंश लिया जाए तो भी यह पूर्ण ही रहता है।
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6. गुरु मंत्र
गुरु को त्रिमूर्ति के समान मानकर उनका सम्मान।
श्लोक
गुरुर ब्रह्मा, गुरुर विष्णु
गुरुर देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म
तस्मै श्री गुरवे नमः।
अर्थ
गुरु ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर के समान हैं। मैं ऐसे गुरु को नमन करता हूँ।
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7. गुरवे सर्व लोकानाम
दक्षिणामूर्ति (भगवान शिव) को समर्पित श्लोक।
श्लोक
गुरवे सर्व लोकानाम
भिषजे भवरोगिणाम
निधये सर्व विद्यानाम
श्री दक्षिणामूर्तये नमः।
अर्थ
हम दक्षिण दिशा के गुरु को प्रणाम करते हैं, जो सभी लोकों के गुरु हैं, रोगों को हरने वाले और समस्त ज्ञान के भंडार हैं।
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8. विद्यार्थी श्लोक
भगवान गणेश की स्तुति करते हुए यह श्लोक।
श्लोक
विद्यार्थी लभते विद्याम्
धनार्थी लभते धनम्
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्
मोक्षार्थी लभते गतिम्।
अर्थ
ज्ञान चाहने वाला ज्ञान प्राप्त करता है, धन चाहने वाला धन, संतान चाहने वाला संतान, और मोक्ष चाहने वाला मोक्ष को प्राप्त करता है।
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9. वक्रतुण्ड श्लोक
भगवान गणेश से सभी बाधाओं को दूर करने के लिए प्रार्थना।
श्लोक
वक्रतुण्ड महाकाय
सूर्यकोटि समप्रभः।
निर्विघ्नं कुरु मे देव
सर्वकार्येषु सर्वदा।
अर्थ
हे भगवान गणेश, जिनका विशाल शरीर और घुमावदार सूंड है, जो करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाशमान हैं, कृपया मेरे सभी कार्यों को निर्विघ्न करें।
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10. या कुन्देन्दु
सरस्वती देवी को समर्पित श्लोक।
श्लोक
या कुन्देन्दु तुषारहार धवला
या शुभ्र वस्त्रावृता।
या वीणा वरदण्ड मण्डितकरा
या श्वेत पद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकर
प्रभृतिभिः देवैः सदा पूजिता।
सा मां पातु सरस्वती
भगवती निःशेष जाड्यापहा।
अर्थ
जो चंद्रमा के समान सफेद, शुभ्र वस्त्र पहने हुए हैं, जो वीणा धारण करती हैं और सफेद कमल पर विराजमान हैं, ब्रह्मा, विष्णु और शिव द्वारा पूजित हैं, वे सरस्वती देवी मेरी अज्ञानता को दूर करें।
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