सच की राह

 मैंने देखा है अक्सर,

बेगुनाह के पास सुबूत कम पड़ जाते हैं,


जिन्होंने दर्द सहा हो दिल में,

वोही इल्ज़ामों के शिकारी बन जाते हैं।


सच का कोई मोल नहीं,

यहां झूठ के सिक्के चलते हैं,


फिर भी वो दिल साफ रखते हैं,

जिनकी आंखों में आंसू पलते हैं।


जिन्हें दर्द का पता होता है,

वो ही खामोशी से सब सह जाते हैं,


जुबां से कुछ नहीं कहते,

पर आंखों से सब कह जाते हैं।


कभी सच की राह तंग होती है,

मगर कदम वो ही बढ़ाते हैं,


जिन्हें अपनी नीयत पर यकीन हो,

वो किसी के सामने सर न झुकाते,।


मैंने देखा है अक्सर,

बेगुनाह के पास सुबूत कम पड़ जाते हैं,


फिर भी वो वक्त से लड़ते हैं,

क्योंकि उनकी रूह साफ होती है,

और सच्चाई हमेशा जीत जाती है


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