उसे एहसास हुआ कि शिवा के लिए उसकी भावनाएँ भी कुछ कम नहीं थीं। लेकिन वह इस उलझन में था कि वह क्या कहे।
अभि ने धीरे से उसका हाथ अपने हाथ में लिया, और उसे महसूस हुआ कि शिवा का दिल भी उसकी तरह ही धड़क रहा है। उसने अपनी आँखें झुकाईं, और फिर उसे वह गाना याद आया, जो उनके कॉलेज के दिनों का पसंदीदा हुआ करता था।
**गाना:**
*"तुम ही हो, तुम ही हो
ज़िंदगी अब तुम ही हो
चैन भी, मेरा दर्द भी
मेरी आशिकी अब तुम ही हो..."*
शिवा की आँखों में आंसू थे, लेकिन वह मुस्कुरा रही थी। अभि ने उसकी ओर देखा और कहा, "शिवा, तुमने जो कहा, वह सच है। मैं भी तुम्हारे बिना अपनी ज़िंदगी की कल्पना नहीं कर सकता। लेकिन मैं डरता हूँ... डरता हूँ कि अगर हम इस रिश्ते को एक नया नाम देंगे, तो क्या हम वही दोस्ती हमेशा रख पाएंगे?"
शिवा ने उसकी बात को समझा और कहा, "अभि, अगर हमारा प्यार सच्चा है, तो हमारी दोस्ती कभी कमजोर नहीं पड़ेगी।"
अभि ने एक गहरी सांस ली और कहा, "शायद तुम्हारी बात सही है। हमें अपनी ज़िंदगी के इस नए अध्याय को शुरू करने का मौका देना चाहिए।"
**शायरी:**
"कुछ रिश्ते खुदा की देन होते हैं,
कुछ अपने हाथ से बनाते हैं।
तुम्हारे साथ की दुआ मैंने माँगी थी,
और अब उस दुआ का फल पाते हैं।"
शिवा और अभि ने उस शाम को अपने दिलों की बातें साझा कीं, और उन्होंने तय किया कि वे इस रिश्ते को एक नया नाम देंगे—एक ऐसा नाम जिसमें दोस्ती, प्यार और समझदारी का मेल हो।
उनके दिलों में एक नया उत्साह था, और राप्ती नदी के किनारे उस शाम का वह पल एक नई शुरुआत की तरह था।
**गाना:**
*"तुमसे ही, तुमसे ही
हर खुशी अब तुमसे ही
मेरा प्यार, मेरा जीवन
अब तुमसे ही, बस तुमसे ही..."*
शिवा और अभि ने एक-दूसरे का हाथ थामा, और उस शाम के साथ अपने रिश्ते का नया अध्याय शुरू किया।
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