शिवा ने अभि की आँखों में गहरी नज़र से देखा, जैसे वह उसके दिल के सबसे गहरे कोने तक पहुँचने की कोशिश कर रही हो। उसने अपनी बात आगे बढ़ाई, "अभि, मैं जानती हूँ कि यह सब अचानक है, लेकिन मेरे दिल में जो है, वो अब और नहीं छुपा सकती।"
अभि ने उसकी ओर देखा, उसकी आँखों में एक संघर्ष साफ दिख रहा था। शिवा के शब्द उसे चीरते हुए उसके दिल तक पहुँच रहे थे, लेकिन वह समझ नहीं पा रहा था कि उसे कैसे जवाब देना चाहिए।
शिवा ने एक गहरी सांस ली और अपनी आवाज़ में थोड़ी सख्ती लाते हुए कहा, "तुम क्यों चुप हो, अभि? क्या तुम्हारे दिल में मेरे लिए कुछ नहीं है? क्या तुम्हारी ज़िंदगी में मेरी कोई अहमियत नहीं?"
अभि ने खुद को संभालते हुए कहा, "शिवा, ऐसा नहीं है। तुम मेरी बहुत अच्छी दोस्त हो, और मैंने तुम्हारे साथ जो पल बिताए हैं, वो मेरी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा हैं। लेकिन प्यार... मुझे नहीं पता कि मैं इस रिश्ते को दोस्ती से आगे ले जा सकता हूँ या नहीं।"
शिवा के दिल में एक टीस उठी, उसकी आँखों में आंसू भर आए। उसने खुद को संभालते हुए कहा, "अभि, प्यार डरने की चीज़ नहीं है। यह एक खूबसूरत एहसास है, जो ज़िंदगी को और भी रंगीन बना देता है। अगर हम एक-दूसरे के लिए कुछ महसूस करते हैं, तो हमें इसे स्वीकार करना चाहिए।"
अभि ने उसकी बात पर ध्यान से सोचा, लेकिन उसके दिल में अभी भी संदेह था। उसने कहा, "शिवा, अगर हम यह कदम उठाते हैं और फिर हमारी दोस्ती कहीं खो जाती है, तो...?"
शिवा ने थोड़ा क्रोध और दर्द मिश्रित आवाज़ में कहा, "अभि, क्या तुम इस डर के कारण अपने दिल की सच्चाई से भाग रहे हो? अगर हमारी दोस्ती इतनी कमजोर होती, तो यह सवाल कभी नहीं उठता। लेकिन अगर तुम मुझे खोने से डरते हो, तो यह बताओ कि क्या तुम मुझे प्यार नहीं करते?"
अभि ने महसूस किया कि शिवा ने उसे एक कड़ी परीक्षा में डाल दिया था। उसकी आँखों में एक झलक आई, जो उसके दिल की गहराइयों को दिखा रही थी। उसने अपने आप से लड़ते हुए कहा, "शिवा, शायद तुम सही हो। मैं खुद को यह मानने से रोक रहा था कि मेरे दिल में तुम्हारे लिए प्यार है। लेकिन अब, जब तुमने यह सब कहा, तो मुझे एहसास हो रहा है कि मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ।"
शिवा की आँखों में आंसू अब और ज़्यादा चमकने लगे थे। उसने अभि के हाथों को और भी मजबूती से थाम लिया और कहा,
**शायरी:**
"प्यार में डर की जगह नहीं होती,
दिल की बातों में कभी कोई झूठ नहीं होता।
जिसने दिल से तुम्हें चाहा हो,
उसके प्यार में कभी कोई कसूर नहीं होता।"
अभि ने उसकी बात सुनकर गहरी सांस ली और उसकी आँखों में देख कर कहा, "शिवा, मैं वादा करता हूँ कि हमारी दोस्ती और प्यार दोनों को हमेशा संभाल कर रखूँगा। तुम मेरे लिए हमेशा खास थी, हो, और रहोगी।"
शिवा ने आंसुओं को पोंछते हुए हल्की मुस्कान दी और कहा, "तो क्या अब तुम मुझे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना सकते हो, अभि?"
अभि ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाया और कहा, "शिवा, मैं तुम्हें अपने दिल की रानी बनाकर रखूँगा।"
**गाना:**
*"तेरा बन जाऊँगा, तेरे ख्वाब सजाऊँगा
तू जो कह दे अगर, तो ये जहाँ भी छोड़ जाऊँगा
बस तेरा बन जाऊँगा..."*
शिवा ने अभि को गले लगाते हुए कहा, "मैं तुम्हारे साथ हर मोड़ पर खड़ी रहूँगी, अभि। हम इस रिश्ते को हर दिन मजबूत बनाएंगे, और हमारी दोस्ती को और भी खूबसूरत बनाएंगे।"
राप्ती नदी की लहरों के साथ उनका प्यार अब एक नया सफर शुरू कर चुका था, जहाँ दोस्ती, प्यार और विश्वास की नींव पर उनका रिश्ता खड़ा था।
Comments
Post a Comment