चोर देश की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ है।
*टीचर ने बच्चों से कहा कि कल चोर पर निबंध लिखकर लाना….?*
कक्षा के super intelligent
छात्र
*BABLOO Babs* ने निबंध ऐसा लिखा…
*"चोर देश की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ है।"*
लोगों को यह मजाक या गलत लग सकता है लेकिन यह वाकई ध्यान देने लायक विषय है।
चोरों के लिए तिजोरियाँ, अलमारियाँ और ताले लगाने होते हैं। जिससे इन्हें बनाने वाली कंपनियों को काम मिलता है।
चोरों की वजह से घरों की खिड़कियों पर ग्रिल लगी होती हैं, दरवाजे लगे होते हैं, दरवाजे बंद होते हैं, इतना ही नहीं बल्कि बाहर सुरक्षा के लिए अतिरिक्त दरवाजे भी होते हैं। कितने लोगों को काम मिलता है।
चोरों के कारण मकानों, दुकानों और सोसायटी के चारों ओर एक परिसर बनाया जाता है, गेट होता है, गेट पर चौकीदार 24 घंटे रहता है और चौकीदार के लिए एक वर्दी भी होती है। कितने लोगों को काम मिलता है।
चोरों की वजह से न सिर्फ सीसी टीवी, मेटल डिटेक्टर बल्कि साइबर सेल भी होते हैं।
चोरों के कारण पुलिस है, पुलिस चौकी है, पुलिस थाने हैं, गश्ती गाड़ियाँ हैं, डंडे हैं, राइफलें हैं, रिवाल्वर हैं और गोलियाँ भी हैं। कितने लोगों को काम मिलता है।
चोरों के कारण ही अदालतें हैं, अदालतों में जज, वकील, क्लर्क और जमानतदार हैं। कितने लोगों को काम मिलता है।
चोरों के कारण जेलें हैं, जेलर हैं, जेलों के लिए पुलिस भी है। कितने लोगों को काम मिलता है।
मोबाइल, लैपटॉप, कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, साइकिल, वाहन जैसी कई उपयोग में आने वाली चीजें चोरी हो जाती हैं तो लोग नई खरीद लेते हैं, इस खरीद फरोख्त से देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलती है और कितने लोगों को काम मिलता है।
उच्च मान्यता प्राप्त और नाम वाला यदि कोई चोर होता है तो देश विदेश की मीडिया की भी रोजी रोटी चलती है।
ये सब पढ़ने के बाद अब आपको भी यकीन हो गया होगा कि
*चोर ही सारे सरकारी सिस्टम की रीढ़ हैं और समाज के लोगों की रोजी रोटी का साधन भी है। 🤣*
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