शिवा ने धीमी आवाज़ में कहा, "अभि, मैं तुम्हें कुछ कहना चाहती हूँ।" उसकी आवाज़ में हल्की सी काँप थी, जैसे किसी ने उसके दिल के भीतर के सारे भावों को एक साथ जगा दिया हो।
अभि ने उसकी तरफ देखा, और उसकी आँखों में वह सवाल था, जो शिवा के दिल में भी था—क्या वह भी वही महसूस करता है जो शिवा कर रही है?
"तुम जानते हो, कॉलेज के दिनों में हम कितने करीब आ गए थे," शिवा ने आगे कहा, "मैंने कभी सोचा नहीं था कि हमारी दोस्ती से कुछ और गहरा महसूस करूँगी। लेकिन अब... अब ऐसा लगता है कि मैं तुम्हारे बिना अपनी ज़िंदगी की कल्पना नहीं कर सकती।"
अभि ने उसकी बात ध्यान से सुनी, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। यह वह पल था जब दोनों के बीच की खामोशी उनके दिलों की धड़कनों से तेज़ हो गई थी। शिवा ने आगे कहा,
**शायरी:**
"इश्क़ वो नहीं जो हर लम्हा तड़पाए,
इश्क़ वो है जो हर लम्हा साथ निभाए।
जिसमें हो सच्चाई और समझदारी,
वही प्यार हमारे दिलों को जोड़ पाए।"
अभि ने उसके चेहरे पर आई हल्की सी मुस्कान को देखा, और .....
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