जीवन का अधूरा पन⏬
*मुकेश अंबानी की व्यथा*
*"जीवन का चित्र अधूरा ही रहता है!*
सृष्टिकर्ता ने जीवन की रचना इस प्रकार से की है कि जीवन में संपूर्ण सफलता देने के बाद भी, वह कहीं न कहीं जानबूझकर जीवन के चित्र को अधूरा छोड़ देता है। इस अधूरेपन की उपस्थिति हमें लगातार जमीन पर ही रहने की याद दिलाती रहती है।
दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में ग्यारहवें स्थान पर और एशिया के नंबर एक अमीर उद्योगपति, रिलायंस समूह के अध्यक्ष मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की दुनिया की सबसे महंगी शादी समारोह के कारण मार्च महीने की शुरुआत में पूरे विश्व में चर्चा हुई। सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हुई।
इस समारोह में मेहमानों को नाश्ता, दोपहर का भोजन, दोपहर की चाय, रात का भोजन और मध्यरात्रि के नाश्ते के लिए 12,000 व्यंजन परोसे गए। इस कार्यक्रम में फिल्म इंडस्ट्री के सभी सुपरस्टार नाचते हुए नजर आए। दुनिया भर की मशहूर ग्लैमरस हस्तियों की उपस्थिति के बावजूद, सभी का ध्यान शारीरिक विकृति से ग्रसित अनंत अंबानी पर था। क्योंकि वह एक गंभीर बीमारी से ग्रस्त है, जिसका पारंपरिक दवाओं से इलाज संभव नहीं है। इलाज के लिए उसे लगातार स्टेरॉइड्स लेने पड़ते हैं। इन कॉर्टिकोस्टिरॉइड्स के कारण अनियंत्रित भूख लगती है, जिससे व्यक्ति अधिक मात्रा में भोजन करता है। परिणामस्वरूप उसका वजन अनियंत्रित रूप से बढ़ता है।
अरबों डॉलर की संपत्ति होने के बावजूद, मुकेश अंबानी का प्रिय और सबसे छोटा बेटा ऐसी बीमारी से ग्रस्त है जिसके लिए स्टेरॉइड्स के दुष्प्रभावों के बिना इस दुनिया में कोई और उपाय नहीं है। अनंत को हाथी जैसी बीमारी ने घेर लिया है, इसलिए मुकेश अंबानी ने हाथियों के इलाज, मनोरंजन, स्पा और मसाज की सुविधाओं से भरी हजारों एकड़ जमीन को सफारी पार्क में बदल दिया है। इस सफारी पार्क में हर दिन सैकड़ों टन सूखे मेवे हाथियों को दिए जाते हैं।
मुकेश अंबानी के बीमार बेटे के साथ के व्यक्तिगत संघर्ष की यह बस एक झलक है। सारी सुख-संपत्ति पैरों में लोटते हुए भी वह अपने बेटे के लिए संपूर्ण स्वास्थ्य का एक भी दिन खरीद नहीं सकता।
इस समारोह में हजारों मेहमानों को संबोधित करते हुए मुकेश अंबानी ने कहा कि उनका जीवन गुलाब की सेज नहीं बल्कि कांटों से भरी यात्रा है।
मुकेश अंबानी ये शब्द बोलते समय, एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति के चेहरे पर कैमरा जूम इन हुआ, उसका चेहरा गहरे दुख में डूबा हुआ दिखा, उसकी आंखों से आंसू बहते हुए नजर आए। उन आंसुओं में दर्द और असहायता स्पष्ट दिखाई दे रही थी। अरबों डॉलर की संपत्ति होने के बावजूद वह अपने बेटे के लिए एक साधारण दिन का पूर्ण स्वास्थ्य भी नहीं खरीद सका, यह पीड़ा महसूस हो रही थी।
कितना अजीब है सृष्टिकर्ता का न्याय? वह जीवन के चित्र को कहीं न कहीं अनजाने में अधूरा ही छोड़ देता है। और इस अधूरेपन में ही पूर्णता का सार दर्शाता है…!
निष्कर्ष - मुकेश अंबानी की संपत्ति का ईर्ष्या करने के बजाय, हमें भी अपने जीवन के अधूरे चित्र के लिए सृष्टिकर्ता का धन्यवाद करना चाहिए। क्योंकि अंबानी के अधूरे चित्र जितनी दुखदायी तस्वीर हमारी नहीं है। इसलिए हम जैसे हैं वैसे ही खुश रहें और जीवन के प्रति आभार और कृतज्ञता व्यक्त करें...
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