नौतपा, तपते नौ दिन और हम
*नौतपा अगर न तपे तो क्या होता है? लोकसंस्कृतिविद दीपसिंह भाटी बताते हैं कि लू तो बेहद जरूरी है। मैं प्रश्न करता हूं, ‘क्यों’ तो वे जवाब देते हैं-*
*'दो मूसा, दो कातरा, दो तीड़ी, दो ताव।*
*दो की बादी जळ हरै, दो विश्वर दो वाव।*
*’नौतपा के पहले दो दिन लू न चली तो चूहे बहुत हो जाएंगे। अगले दो दिन न चली तो कातरा (फसल को नुकसान पहुँचाने वाला कीट)। तीसरे दिन से दो दिन लू न चली तो टिड्डियों के अंडे नष्ट नहीं होंगे। चौथे दिन से दो दिन नहीं तपा तो बुखार लाने वाले जीवाणु नहीं मरेंगे। इसके बाद दो दिन लू न चली तो विश्वर यानी साँप-बिच्छू नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे। आखिरी दो दिन भी नहीं चली तो आंधियां अधिक चलेंगी। फसलें चौपट कर देंगी।*
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