नया जमाने में लड़के की वही पुरानी जिम्मेदारी
कल स्कूल में क्लास 10 के बच्चों के साथ बैठे देख रहा था,और सोच रहा था क्या बदल गया?
क्लास में 2लड़का लड़की सामने से दूसरी बेच पर बैठे थे, लड़की को कोई सवाल शायद नही आ रहा था,लड़का उसकी हेल्प कर रहा था। उसे देख कर मैंने सोचा कि लड़के को भले ही वो सवाल ,वो पूरा चैप्टर न समझ में आया होगा,पर अब उसके जिम्मेदार कंधों पर लड़की को समझाने की जिम्मेदारी है,लड़के बखूबी इस जिम्मेदारी को निभाते हैं।
खास बात यह होती है कि लड़की को बताते वक्त पूरा कॉन्फिडेंस दिखाना होगा और जुगाड लगा कर लड़का, जिसे टीचर की बात शायद ही समझ आई हो, लड़की को सवाल समझ समझ के एक एक कदम फूंक कर अंततः समझा ही देता है।
अगर ऐसा नहीं हुआ,तो अब उसके सामने दो ही विकल्प है -
पहला, ये सवाल ही गलत है,ये साबित करना या फिर...
समझ में तो आया था,अभी अभी दिमाग से slip हुआ।
ये जो बात है न ,वो 20-25 साल पहले भी" हमारे जमाने" में सच थी और आज के जमाने में भी। मुझे पता है ये शायद ही कभी बदले।
ये सोच कर मुझे बहुत हंसी भी आई और शायद सुकून मिला कि कुछ बातें समय काल परिस्थितियों में कभी नहीं बदलती।
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