मंदिर जाना

सप्ताह में कम से कम एक दिन सभी लोग मंदिर जरूर जाए,

हो सके तो परिवार के साथ...

हो सके तो आरती के समय के आसपास पहुंचे या आरती होने तक रुके।

बच्चों को भगवान से जुड़ी कहानी भी बता सकते हैं,

आसपास का कुछ इतिहास हो तो उस से भी बच्चों को जोड़ सकते हैं।

मतलब इतना है,की बच्चो को संस्कार से जोड़ना।

समय का अभाव नहीं होता है, हम बना लेते हैं,

Restaurant, movie इन सब के लिए आप समय निकाल रहे हैं तो मंदिर के लिए भी निकाल सकते हैं।

और हां,

वहां भिखारियों को पैसा देना जरूरी नहीं है, न दे तो बेहतर होगा, इसके दुरुपयोग की संभावना दिखती है।

यथा सम्भव भोजन, पुराने कपड़े से मदद करना चाहे तो ही , करे।


याद रखे , ये सिर्फ आपको मन की शांति ही नहीं देगा , बल्कि बच्चों को संस्कार भी देगा। कल आपको बुढ़ापे में old age home जाने की संभावना को कम करेगा।

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