दोस्त मित्र बिंदी
जिंदगी बोला है जब भी आपने..
संगीत सुना है..
नहीं..
तो सुनाता हूं आज..
जिंदगी बनी.. तीन अक्षरों पे बिंदी लगा के..
ये बिंदी होते हैं दोस्त..
बिन इनके जिंदगी
का संगीत कहाँ सुनाई देता है..
आसमां में देखो जब दिन में उजाले लिए आता है सूरज..
आकाश में ये भी बिंदी की तरह दिखता है..
जिंदगी के आकाश में सूरज वाली बिंदी हैँ ये दोस्त..
जब भी अंधेरे मन की आँखों को बंद कर देते हैं..
किरणे उजालों की लाते हैँ दोस्त..
रात के अंधेरे का सहारा होता है बिंदी नुमा चाँद..
जिंदगी के धुप अंधेरे में मुसीबतों की गर्मी में..
ठंढे उजाले वाली बिंदी नुमा चाँद हैं दोस्त..
औरत के चेहरे के दुःख को छुपा, सुंदरता चरम पर ले जाने वाली बिंदी भी..
जिंदगी के चेहरे की सुंदरता बढ़ाते, दुःख को छुपाते हैँ ये जिंदगी के बिंदी नुमा दोस्त..
पर जिंदगी में बस वो ही खुसनसीब हैं जो..
खोज पाते हैं बच्चों के लिए सुंदरता खो देती बिंदी के बिना भी सुंदरता की पराकाष्ठा लाती माँ में खोज पाते दोस्त..
सुबह के उजाले रात की ठंढ खो देते जिंदगी की बिंदी बनते पिता में सच्चा वाला दोस्त..
परिवार की जरूरतों की बिंदी देखी आपने..
इन जरूरतों की बिंदी में खुद को गुम करती बिंदी सी मासूम बहन मे इक सांस की तरह वाला दोस्त..
खोजा तो खुदा ना दिखा पर दिखे हैँ...
ये जिंदगी की बिंदी बनते दोस्त..
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