शिवा का शिवा होना1
"अभि की "ई" की मात्रा शिवा को शिवा बनाती थी,
बिना उस आखिरी ई के शिवा शव के जैसी हो गई है।"
कहते हुए शिवा की बेस्ट फ्रेंड के आंखों में गीलापन दिखने लगा था। उसे छिपाने की कोशिश नाकाम ही रही।
शिवा को जिसने अभि के साथ मुस्कुराते, शरमाते, तिरछी निगाहों से अभि की निगाहों से प्यार की बूंद टपकने का घंटों इंतजार करते, निहारते देखा हो, फिर भी थकान की एक शिकन भी माथे पर न खोज पाई हो ।
उसे याद है, जब वो दोनों शाम को अभि की बातें करते तो शिवा " एक चाय और " या "एक चाय उसके नाम की" कह कर आंख दबा कर खिल खिला कर हंसते देखती,
वो शिवा को एक कप चाय बनाने में थक जाता देखने से कैसे संतुष्ट हो पाती। उसे शिवा के मुंह से ये सुनकर और भी दुख हुआ था,जब शिवा ने "आज कुछ बनाने का मन नही है,वो उनकी मीटिंग है तो उनको बाहर से खा कर आना है,तो मैगी खा लूंगी।"
मैगी अभि और शिवा दोनो को ना पसंद थी, दरअसल ये बात भी सिर्फ मुझे पता थी कि शिवा अभि से मिलने से पहले तक मैगी खा भी लेती थी,लेकिन अभि ने क्लास में अपने एक दोस्त,जो किराए के मकान में रहता था,को मैगी खाने के लिए लंबा लेक्चर दिया था,तो शिवा सिर्फ अभि को बोलते देख रही थी,यही तो शिवा को सबसे अच्छा लगता था, अभि को बोलते देखना। शिवा फिर मैगी से नफरत करने लगी थी।
प्यार में सामने वाले को निहारने में जाने कौन सा रस मिलता है,ये मैं कभी समझ न पाती अगर मैं शिवा को पहले से न जानती, उसके जैसी घरेलू ,मां बाप की लाडली लड़की कब अभि के प्यार में दीवानी हुई, मैं उसके साथ होकर भी तब जान पाई थी,जब दोनो एक दूसरे की जान में धड़कने लगे थे।
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