चुप सा प्यार१

 "तुम्हें क्यूं लगता है कि मैं ये रिश्ता खत्म मान लूंगा"

अभि ने गुस्से में शिवा से पूछा।

"क्यूंकि तुम मुझसे प्यार करते हो "

शिवा ने हमेशा की तरह शांत हो कर कहा।

वो हल्के से मुस्कुराई थी। पर अभि से मुस्कान का दर्द कहां छुपा पाती, हल्के से दो बूंदें आंखों के कोनों पर उभरने लगे थे।

"मुझे लेट हो रहा है, गली के पीछे..."

शिवा पूरी बात कह भी नहीं पाई थी कि अभि ने गाड़ी स्टार्ट कर के शिवा के सामने खड़ा कर दिया।

वो चुप कर के हमेशा की तरह बैठ गई थी।

दो चुप बैठे लोग कितनी बात करते हैं ये अहसास ही शायद प्यार कहलाता है ...

अभि शिवा के घर के पीछे वाली गली पे छोड़ कर जा चुका था। शिवा भारी कदमों से घर पहुंचने के लिए बेमन से बढ़ चली।


आज सात साल बाद शिवा ये बात सोच कर मुस्कुरा दी थी। जाने इस मुस्कान का दर्द कोई समझा या ये यूं ही रहा।

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