झुकेगा नहीं रे
आज कल एक मूवी का ये डायलॉग "झुकेगा नहीं रे" बहुत फेमस हुआ है। दर असल ये कोई साधारण बोला चाल नहीं न ही डायलॉग ही है,ये आज की जेनरेशन को मिल रही सीख और संदेश है जो आज कल के माता पिता बच्चों को दे रहे हैं।जी हां ये एक बड़ा सच है।
खास तौर पर वो मां या पिता जिन्होंने जीवन में बहुत संघर्ष किया,एक एक खुशी बहुत मेहनत से बटोरी है या पाई है।
जी हां। क्योंकि आपने जीवन में हर खुशी के लिए झुकना या sacrifice करना स्वीकार किया है जो कई जगह बहुत अपमान जैसा भी लगा है। कभी रिश्तों को संभालने के लिए झुकना या sacrifice करना स्वीकार किया, भाई बहन दोस्त रिश्तेदार हर किसी ने कभी सम्मान के लिए कभी प्यार के नाम पर।
फिर मन में एक द्वेष (दुश्मनी) जैसी भावना का जन्म हो गया, जो हर बार ,जब भी आपको झकना पड़ा,मन में एक गांठ बनाता चला गया।बहुत ही जहरीली गांठ।मन में जहर से ज्यादा खतरनाक।
ये अपने आप में एक विरोधाभास भी है, क्योंकि जब आप खुद संघर्ष कर के झुक के आज सफल बने हैं या "लायक" बने हैं तो बच्चों को क्यों इस से दूर कर सकते हैं ।
क्योंकि एक बड़ा सच ये भी है की आज आप अपनी सफलता और आगे बढ़ने में, लोगों के बीच सम्मान पाने में इस थोड़ा सा झुक जाने की महत्ता या importance को नहीं समझ पाए।
*ये पोस्ट ज्यादा से ज्यादा लोग जब पढ़ पाएंगे और सहमत होंगे तो मैं फिर इस बात को आगे लिखने की हिम्मत करूंगा।*
Comment जरूर करें।
Bahut khub
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