गुम लड़का

 ये बच्चा जो फोटो में बीच में बैठा है,उसे देख के आप सोच रहे होंगे कि कितना प्यार मिलता होगा, मां और दादी का लाड दुलारा है,

जी नहीं आप गलत सोच रहे हैं।

ये फोटो उसकी उसे जबरदस्ती कर के खिंचवाई गई है।

क्यूं?

जी वही बताने के लिए फोटो डाली है।

बच्चे की उमर २ - ३ साल की थी,

एक रविवार की सुबह वह सीढ़ी से उतरा,

क्यूं?

अरे भाई , वो लोग दुमंजिले पर रहते थे, ललितपुर, ऊ प्र, में।

तो वो उतरा, तो मां बाप खुश हुए चलो,ये बदमाशी से फुरसत मिली।

क्या??? नहीं हुए।

अरे हुए तभी तो रोका नही। चलो दरवाजा ही बंद कर देते।

ना जी, ये जाए बाहर।

छड़िए, तो वो उतरा और दो तीन घंटे नहीं आया।

तो मां बाप को चिंता हुई।

हां, चिंता ,की कही उसे हमसे अच्छे मां बाप तो नहीं मिल गए।

जी, तो वो बच्चा अक्सर नीचे बगल के घर में जा के खेलता था। क्यों, अरे घर में प्यार नहीं मिलेगा तो बच्चा बगल में जाएगा ही।

तो ये लोग वहां खोजने गए। ललितपुर में बड़ी महिलाओं को "बा" बोलते हैं। तो उन्होंने बा से पूछा तो पता चला "आज तो सुबह से वो आया ही नहीं।

फिर, कहा गया वो। 

"वो रवि कहां है? वो कही उसके साथ तो नहीं है"

मां ने पूछा। ये रवि अब कौन है। जी , रवि ,बा का लड़का है,जो ऑटो चलाया करता है।

और खास बात, वो उस लड़के का बेस्ट फ्रेंड है।

जी हां बेस्ट फ्रेंड, वो अक्सर उसे साथ घुमाता खिलाता था।

अक्सर सुबह शाम वो साथ बिताते।

देखा ना आपने बियाचारा लड़का, घर में प्यार ना मिले तो ...

खैर, पता चला रवि भी घर पे नहीं है सुबह से।किसी सवारी को स्टेशन छोड़ने गया था। स्टेशन वहा से काफी दूर था, तो रवि के साथ जाने की संभावना खतम हो गई।

सन्डे को रवि घर पर ही रहता था, क्यूंकि ललितपुर में आम दिनों में भी भीड़ कम ही ऑटो यूज करती थी, सन्डे को शायद ही कोई निकलता। किसी को station जाना होता तभी वो ऑटो बुक करता।

अब क्या होगा?


मां बाप ने आज पास की दुकानों पर खोजना शुरू किया।

मगर उसे किसी ने नहीं देखा था।

कुछ लोगों ने कहा शायद वो पुल की ओर गया था।

वहां पास में एक नहर थी, उस नहर के ऊपर एक बहुत लंबा पुल बनाया गया था।बड़े लोगो पर वॉक करने जाते थे क्युकी वो बहुत लंबा चौड़ा पूल था।

वहां बच्चे का पहुंचना तो कठिन था, पर जितना टाइम उसे गए हो गया था ये नामुमकिन भी नहीं था।

अब तो सांस अटक गई थी सबकी।

लोग वहां जाने की राह देख ही रहे थे, कोई ऑटो मिले तो चला जाए, सोच ही रहे थे की सामने से रवि ऑटो ले कर आता दिखा, 

उन्होंने अभी सोचा कि चलो इसी से पूल पर चल कर देख आते हैं,तभी

उनकी नजर ऑटो में ड्राइवर के बगल वाली सीट पर गई, बड़े प्यार से मुस्कुराते हुए बैठे हुए वो लड़का दिखा।

सबकी जान में जान आई या लोग दुखी हुए ,पता नही।

पता ये चला की रवि जब स्टेशन को निकाल रहा था की ये साहब सीढ़ी से नीचे उतर रहे थे।

बस फिर क्या।

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