झगड़ा और गुस्सा १

 "अच्छा बाबा अब मै कभी तुम पर गुस्सा नहीं करूंगी।"

शिवा ने माफी मांगते हुए अभि से कहा। 

"नहीं मै नहीं मानता, तुम गुस्सा करती हो और झगड़ा करती हो।"

अभि छोटे बच्चे की तरह बोला।

"अभि ~~~" शिवा लगभग खीझते हुए बोली।

"अच्छा ठीक है मैं झगड़ा भी नहीं करूंगी। बस हो गया, अब दवा खा लो और मैंने टिफिन में गाजर का हलवा दिया है खा लेना।"

"हलवा, yummmm।" अभि हॉस्पिटल के कमरे में रखे टिफिन को देख कर बोला। 

"अच्छा रखो फोन वरना कंपनी वाले तुम्हे दिन में ३६(36) दफे फोन करने पर नौकरी से निकाल देंगे।" शिवा मुस्कुराई।

"क्या यार अभी तो दर्द कुछ कम हुआ था, चलो कोई बात नहीं।  6 बजने वाले हैं, तुम्हे भी घर जाना होगा और पापा भी आ रहे होंगे।"

"ओह हो जी, मेरी चिंता नहीं है, पापा का डर है केवल। वैसे ठीक भी है,पापा जी से बात किए बहुत दिन हो गए हैं, आने दो पैर छू लेंगे।"

शिवा शरारत से मुस्कुराई।

"हु ह डर कैसा? आने दो। पापा को सब पता होता है।"

अभि विश्वास से बोला।

" पर एक मिनट तुम्हारी पापा से अभी ऐक्सिडेंट वाले दिन ही तो बात हुई थी"

ऐक्सिडेंट वाले दिन सुनते ही शिवा के मन में उस दिन की याद ताजा हो गई और आंख तो जैसे इन्हीं यादों के भरोसे जिंदगी को rewind करने को तैयार रहती है पर इसमें अगर नमी आ जाए तो याद और भी वजन बना लेती हैं।

शिवा को दुख था कि अगर उस दिन उसने अभि को वो बात नहीं बताई होती तो अभि गुस्से में उस बाइक वाले से झगड़ता नहीं। आखिर हल्की सी खरोच ही तो आई थी उसे, उसकी गाड़ी से, जानबूझ के ही सही। पर वो तो लड़कियों को अक्सर झेलना पड़ता है , लोग या कहे बदतमीज लड़के ,लड़कियों को देख कर इस तरह की हरकत करते हैं । क्या पहले जब अभि उसकी जिन्दगी मे नहीं था तो ऐसा नहीं होता था? फिर क्या वो कुछ कर पाती थी? नहीं ना। उस दिन भी अभि को ना बताती तो वो लड़के अभि की गाड़ी के आगे जा कर घर की गली पर तेल नहीं गिरते और वो मुझे छोड़ के जाते समय नहीं गिरता। 

पर अभि को चोट लगने का दुख नहीं था, दुख था कि ऐसा क्यों होता है कि किसी लड़की को परेशान करने वाला इस हद्द तक जा कर उसका पीछा करने के बाद उसे और उसके साथ खड़े इंसान को चोट पहुंचाने की हिम्मत तो जुटा पाते हैं पर किसी लड़की को बचाने के लिए ऐसा नहीं कर पाते।

अभि ने पापा के आने पर उस दिन हॉस्पिटल में सब बता दिया था, तभी तो पापा ने शिवा को बुलवाया था और मुलाकात कर के उस से बात की थी। क्या बात हुई थी ये तो नहीं पता ,पर उस दिन से शिवा खुश बहुत थी। और" एक बात" अभि ने सिर खुजाते हुए सोचा" शिवा उस दिन से पापा को अंकल जी की जगह पापा जी कहने लगी थी।

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