विदा 1
विदा,
ये सब्द है ये ख़ास है,
ये अजब सा अहसास है,
ये अक्षरों का बस मेल नहीं,
ये कुछ सब्दो का खेल है,
विशेष यादों का यहां वादा है,
कुछ आंसू कुछ मुस्कान ज्यादा है।
विदा,
यादों के बादल लाते हैं,
मन की धरती को भिगाते है।
जब विदा के बादल छाते हैं,
मन की धरती को भीगाते हैं।
विदा,
नए सृजन से जुड़ती है,
मन को भी ये तरती है।
विदा,
ये सब्द है ये ख़ास है,
ये अजब सा अहसास है,
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