रह ही जाता है

 कुछ यादों में कुछ सांसो में

तुम थम ही जाते हो।

कुछ रातों में कुछ बातों में

तुम ठहर ही जाते हो।

कुछ हवास में कुछ बदहवास में

तुम रह ही जाते हो।

कुछ जवाब में कुछ सवाल में

तुम दिख ही आते हो।

कुछ बताने से कुछ छुपाने से

तुम फिसल ही आते हो।

रोज सूरज दिन उजालों से

कहता हूं कि

 आज तुम्हें भूल ही जाऊंगा,

पर चांद रात अंधेरों में तुम निकल ही आते हो।

सुना है जिंदगी थम ही जाती है सांस धड़कनों के छूटने के बाद,

पर यादों का कारवां कहां थमता सा दिखता है,

जिंदगी क्या 

लकड़ियों की राख के साथ।

सुना है जिंदगी थम ही जाती है सांस धड़कनों के छूटने के बाद,

पर यादों का कारवां कहां थमता सा दिखता है,

जिंदगी क्या 

लकड़ियों की राख के साथ।


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