दर्द को बहना होगा
*दर्द,
बहता जरूर है,
रात अंधेरों में
, आंसूओं के दरमयां,
सुबह, उजालों
स्याही से शब्दों में बयां।
दर्द,
बहता जरूर है,
सांसों से आते जाते,
हवाओं के दरमयां,
दिल में धड़कते,
धड़कनों से,
कभी तेज भागते,
कभी संयम धरने में बयां।
दर्द,
जो बह ना सका,
तो होगा वो दिल में बहते लहू में जमा,
रोक देगा जो धड़कनों की जुबां।
दर्द,
जो बह ना सका,
तो होगा वो
माथे की शिकन से बयां।
दर्द,
जो बह ना सका,
ईक दिन ,
कर देगा आसमानी सुबह में,
ये जिस्मों को फ़ना।
दर्द,
जो बह ना सका,
ईक दिन ,
कर देगा आसमानी सुबह में,
ये जिस्मों को फ़ना।
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