सवाल शाम के साये से १

कुछ सांसे,

कुछ धड़कनें,

कुछ जुबां।

शब्दों से परे,

दिल की गहराईयों से उभर कर,

भावनाओं के रास्तों से,

कुछ फूल कुछ कांटों के दामन से उलझी,

प्रेम की बात,

दो दो रूह से भी मिलकर

हमेशा अधूरी सी क्यूं रह जाती है?

अधूरे प्रेम की दास्तां से भरी,

दुनिया में मुहब्बत थम क्यूं ना जाती है?


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