रंग प्यार के १

रंगों की अपनी ही कहानी होती है, जैसे ये लाल रंग,

मुहब्बत के लाल गुलाब से खून के भयानक लाल रंग तक अपना विचार संसार रचता है।

गुस्से से विध्वंस मचाने पर लाल होता चेहरा,

प्रेम निर्माता वाले शरम से लाल होते चेहरे को अद्भूत सौंदर्य प्रदान यही रंग करता है।

आज मैं रंगों की बात क्यूं कर रहा हूं? बताता हूं।

जीवन में जब प्रेम दस्तक देता है तो सफेद काले रंग से लीपे हुए जीवन में इंद्रधनुष से रंगों की हल्की छाया सी पड़ती दिखती है।

आज मेरे जीवन में कुछ ऐसा ही रंग दरवाजे के पीछे छुप कर थप्पी मार के दस्तक दे रहा था।

लाल रंग का छाते के नीचे,

मेरे देर करने से शायद हुआ लाल चेहरा कुछ आज अलग ही दिख रहा था।

बारिश की छींटाकशी करने के बाद छंटते बादलों से नारंगी सूरज की किरनें चेहरे पर पड़ते हुए लालिमा को कुछ और रोमांचित कर रही थी ।

पर शायद आज चेहरा गुस्से से नहीं किसी और वजह से लाल था।

इधर शिवा आज कुछ अलग ही संसार रचने को खड़ी थी ।

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