बिखरी मुर्दा मुहब्बत

 ईक सांस से उस सांस तक,

ईक आस से उस आस तक,

चैन सुकुन पाने की ,

नैनों की उस तलाश तक।

खोजते नैन ,

खो जाते चैन,

तेरे इस दायरे से,

दरिया ए दर्द के दायरे तक।

छलकते आंख के लहू से,

बहते धड़कनों में आंसूओं तक।

सूरज के आसमानी सुबह से,

समंदर में धुलने के वास्ते डूबने तक,

जिंदगी के बंद सांसों से,

मौत की खुली आंखों तक,

सिर्फ मुहब्बत की सुनामी से,

तबाह चाहतें बिखरी पड़ी थी ।

तेरी ईक मुर्दा तलाश से ,

मेरी इस जिन्दा लाश तक।

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