बचता क्यूं नहीं

अगर आप मिडिल क्लास  समाज से हैं,तो कंजूस शब्द से आपका परिचय हुआ ही होगा, कभी ना कभी,

कहीं ना कहीं किसी मोड़ पर हुआ होगा।

हां कंजूस, ये प्रजाति अपने धन बचत के लिए जानी जाती है,

या यूं कहें की अधिक से अधिक धन बचाने की बहुते खतरनाक कार्यों के लिए ।

जईसे इनके वहां एक किलो घी पहले तो आता नहीं, और गर कोई दे जाए तो सालों साल खतम ना हो, हां हां सच्ची।

अरे कईसे का, देख के स्वाद लेने वाले लोग होते हैं, तभी तो कंजूस कहलाते हैं ।

जी, अब आप कहेंगे मिडिल क्लास ही कंजूस क्यूं,

तो बंधु गरीब पईसा कम खरच करे तो बेचारा गरीब है, अमीर कम खरचे तो बचत होती है तो ये तमगा कंजूसी का मिडिल क्लास के सर पर आता है।

तो आज मैं बात करने जा रहा हूं कंजूसों में भी अलग प्रजाति की, जी हां इनकी प्रजाति भी होती है, अलग अलग।

कल ही मालूम हुआ तो सोचा आप सब को बताउं।

तो एक कंजूस होता है, जो गाड़ी रखेगा,पर चलाएगा नहीं।साफ चमका के रोज निहारेगा।

एक होता है वो कंजूस जो गाड़ी से पूरा शहर घुम के आएगा घर। बस घर से कुछ दूर गाड़ी बंद कर देगा।

क्यूं?

अरे भाई पेट्रोल बचाने के लिए। जी हां।

और ये जो प्रजाति है ना ये समान पांच रूपया सस्ता लेने के लिए पांच से ज्यादा का पेट्रोल जला देंगे गाड़ी पर बचत जरूर करेंगे समान लेने के लिए ।

और भी ऐसे कई कारमानों से ये जद्दोजहद करते हैं ये।

महिने के आखिरी में सर खुजाते हैं की ससुरा ईतना कंजूसी किए पर पइसा बचा ही नहीं ।

चलिए कोई ऐसा मिले तो सहानुभूती रखिएगा, और हां,

नोट -

बताने मत लगिएगा कि पईसे क्यूं नहीं बच रहे वरना आप अपनी हालत के खुद जिम्मेदार होंगे।

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