वायुसेना दिवस
आसमां में उड़ते परिंदों को देखकर मन में इक सवाल कौंधता है, सोचता हूं पूछ लूं।
क्या आपका मन होता है? आसमां की ऊंचाईयों को छूने का?
और सोचिए इस उड़ान में देश की सुरक्षा और सम्मान जुड़
जाए तो।
तो जिंदगी ही नहीं मौत को भी खुद पर गुमां हो जाए।
आप सोच रहे होंगे मैं क्या बात कहना चाह रहा हूं?
तो मैं बात कर रहा हूं,भारत की २४००० कि.मी. की अंतर्राष्ट्रीय वायु सीमा सुरक्षा में सफलतापूर्वक संलग्न भारतीय वायुसेना की , जिसका अवतरण आज ही के दिन सन् १९३२ में हुआ ऱायल ब्रिटिश इंडियन एयरफोर्स के रूप में।
जिसे आजादी के बाद गुलामी के प्रतीक रायल ब्रिटिश शब्द से १९५० में आजादी मिली।
आरम्भिक दौर में जहां रूसी सहयोग से मिग,सुखोई ,मिराज जैसे विमानों ने सीमा को सशक्त किया, वहीं भारतीय मेधा का परिचय देता हुआ तेजस वायु सेना को चौथी पीढ़ी के ताकत से रूबरू कराता हुआ सहायक सेना के दोयम दर्जे को आज विश्व की चौथी ताकत बनाने में सफल रहा है ।
आने वाले विजयादशमी के पावन अवसर पर १७वीं स्क्वाड्रन या गोल्डेन ऐरो के रूप में हरियाणा के अम्बाला एयरबेस तथा पं बंगाल के हासिमारा एयरबेस पर भारतीय ताकत को ४.५ पीढ़ी की क्षमता से जोड़ेगा।
यूं तो द्वितीय विश्व युद्ध से शुरू वायुसेना का सफर १९६५,१९७१ के युद्धों मे दुश्मन के दांत ही नहीं खट्टे करने तक से ना हो के वरन दुस्मन के राजधानी तक भारतीय परचम लहराने तक तो जाता है ।
साथ ही केदारनाथ आपदा से लेकर कश्मीर बाढ़ मे लोगों के सहयोग से भी जुड़ने में रहा।
फिर भी गर किसी को हमारी वायुसेना की ताकत पर शक है तो दो पंक्तियों में बात पूरी करूंगा,
कि उन्हे जिन्हे लगता है कि
हमारी उड़ान कुछ कम है,-२
हमें यकीं है कि ये आसमां कुछ कम है ।
धन्यवाद ।
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