जीवित कमरे, किराए के २
कमरे भी हैं सांस लेते,
कमरे भी होते हैं जीवित,
हैं ना यकीन तो आजमा लो,नुस्खे ये कुछ।
देख लो,
ईक बार दिवारों के साथ बांटे आंसू याद करो।
जब दिल टूटा था तेरा किसी रिजल्ट के आने के बाद ।
या टूटा था उस खूबसूरत फसाने के साथ,
लिपट के रोना था किसी से लग के,
पकड़ के सिमटे रहे खुद को कोनो के साथ ।
कमरा किराए का था पर उसमें यादें जीवन की थी ।
यादें कमरे के कोनो कोनों पर थी,
रात देर तक जगना,
गाना जोर जोर से या गुनगुना देना यूं ही ।
बेसुरी आवाज का सूर या रहा ईक तान सूना,
कोई सुनता काश तुमको,
रह गया कुझ अनसुना।
चाय के प्यालों से कॉफी की महक तक,
रात अंधेरों में बहती,
जलती बुझती राख में भक।
कमरा सब झेलता था,
राज तेरे साथ मे सब मुंह कहां ये खोलता था।
पैर दिवारों पर रखना ,
नजर छत पर थी टिकी।
नींद के आने से पहले,
आंख थक कर,
थी किताबों पर रूकी।
क्या कहूं कुछ छूट जाता,
कमरों पर जो भी कही।
क्या कहूं कुछ छूट जाता,
कमरों पर जो भी कही।
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