२अक्टूबर
पाठशालाओं मे सीखना शुरू करते हुए हम अक्षर से शब्द, शब्द से वाक्य और फिर होता कहानियां अनुभुति की ओर बढ़ते हैं।
पर जीवन की पाठशाला में इक शब्द "गांधी" शास्त्री टैगोर कहा नियां- अनुभवों , समस्याओं के समाधान की सम्पूर्णता के शिखर को प्रदर्शित करता है।
वैसे तो गांधी जी से शायद ही किसी को समस्या होगी पर मैं कुछ लोगों को जनता हूं, जी नहीं वो भगत या बोस के समर्थक नहीं परयावरण वाले हैं।
कैसे ?
अरे वो बेचारे कागज बचाओ को नारा देते हैं और लोग गांधी पर कागज पर कागज खर्च कर डालते हैं।
खैर ये तो हुआ हंसने के लिए ।
पर सच यही है कि आप समाजिक- राजनीतिक
यहां तक की आर्थिक, जो आज की सबसे बड़ी समस्या है, का समुचित समाधान देते हुए दिखते हैं ।
आप घर में हो रहे सामान्य कलह विग्रह को देखें या राजनीति के धुंधलकों में धर्म के चश्मों पर से होने वाली सामाजिक कलुसता पर चमकने वाली सीढ़ी को परखें हर कसौटी को गांधी तोड़ देते हैं ।
जहां सादा जीवन जीने की प्रेरणा से लेकर अपने आसपास के संसाधनों के समुचित प्रयोग से अर्थ अर्जन का मार्ग दिखाते दिखाई देते हैं ।
सामान्य से दिखने वाले दो महामानवों में शास्त्री जी जहां सादे जीवन की सामाजिक नैतिक सर्वोचत्ता का प्रदर्शन करते हैं, वहीं पाकिस्तान से युद्ध में भारत की जीत के प्रेरक प्रणेता से अमेरिकी पींएल खाद्यान्न ,जो जानवर के खाने लायक नहीं था को वापस कर एक दिन के व्रत की प्रेरणा से देश का गौरव स्थापित करते हुए इतिहास के पन्नों को गौरवान्वित करते हैं ।
अभि कुछ दिन पहले लता जी का जनमदिन था।लता जी के साथ कहते हैं एक ही नक्षत्र मे सात कन्याओं का जनम हुआ था पर कोकिला या कोयल वही बनी पर दो महान आत्माएं धरती पर आने के लिए एक ही दिन चुने ये प्रकृति के कुछ कृत्य हमसे परे हैं ।
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