आखिरी प्रेम
मुझे याद है, सितम्बर का महिना था,
तेरी तन्हा दुनिया में मैं आया था।
तू पिंजरें से कैद आजाद पंछी की तरह पंख खोल रही थी,
तूझे उड़ना था, पर तुम डरती थी, आसमान के और बड़े परिंदों से भी और जमीन के शिकारी इंसानों से भी।
दिल में तेरी तन्हाईयों के सिवा कुछ ना था। मेरी जिंदगी से शिवा जा चुकी थी, पर मैने दिल के दरवाजों पर ताला लगा लिया था।
किसी को भी आने नहीं देना था यहां। दिल के कमरे में शिवा के जाने के बाद टूटे दिल की दिवारें सीलन भरी थी, जगह जगह कांच के टुकड़े पड़े थे, इसमें आना घायल कर देने वाला था।
तुम आ गई थी ।
लोग पूछते हे़ैं, साथ अपना कैसे छुटा?
तेरे दिल में भीड़ हो गई थी, मुझे तो तन्हाईयां पसंद थी।
Nice 👍
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