हिन्दी हमारी वैसे तो मातर भाषा कहलाती है।
पर आनलाइन वाली मैडम जब व्याकरण पढाती हैं तो,
मां हमारी पानी लेने चली जाती हैं।
गणित के गुरू भी क्या गजब ढांते हैं,
एक दो तीन से अंग्रेजी का एक्स भी मिलाते हैं,
पिता जी बच्चों के मास्टर को गलत बताते हैं,
हम भी ए बी सी डी जेडवा तक पढ़ें हैं कहकर मासटर को दो बात सुनाते हैं,
विग्यान का पूछो ही मत,
मैडम ने कैमिकल से किया कमाल,
जल में भी आक्सीजन,
जलाने में भी आकसीजन जब से इनहोने बताया है,
मां का किचन में सांस लेना दूभर हो आया है,
पूछा किचन में जोर से सांस क्यूं लेती हो बोली आग जलाने के लिए
दादी के पास क्यूं जोर से सांस लेती हो तो बताया......
समझ ही गए होंगे।
सामाजिक विग्यान का क्या ही बताऊं हाल,
मैने खुद पाल लिया बवाल,
मैने कहा मैं भी आनलाइन पढ़ाउंगा ,
बच्चों के सारे डाउट मिटाउंगा,
सभी भुक्तभोगी लोगों ने समझाया,
पर हमरी बुद्धी में कुछ ना बुझाया,
हमने भी ग्रुप का प्रयोाग बतलाया
लोगों से टापिक मंगवाया,
बच्चेो भी वीडियो से कहां डरे बैठे थे,
प्रशनों को मन मे गुब्बार भरे बैठे थे,
छूटते ही उन्होने पलट वार किया,
पूछा मैंने टापिक उनहोने चैपटर का नाम दे मारा,
मैं संभला कि बेटा इसका टापिक बताओ,
लड़की बोली गुरूजी , पूरा पाठ ही बतलाओ।
।
अब कमपूटर की क्या ही बात करें
वो तो आनलाइन का जनमदाता ,माई बाप कहलाता है,
बच्चा मर मर के सौ तक गिनती याद करता है,
मास्टर का डंडा और पापा चांटा जोर से गाल पर पड़ता रहा,
और कमपूटर के सर ने जीरो और एक को पूरी दुनिया कहा।
क्या बताएं क्या है आनलाइन का हाल।
बच्चों के साथ मां बाप ही नहीं शिक्षक भी है बेहाल।
पर किसी भी परिस्थिति से जो भीड़ना सीखाता है,
सही मायनों ं़मेॉ वही शिक्षक कहलाता है।
सही मायनों ं़मेॉ वही शिक्षक कहलाता है।
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