हमनवां मेरी तेरे जाने के बाद
देखो ना ,
तेरे जाने के बाद भी मैं अकेला कहां होता हूं,
जब भी रोता हूं तेरी कमी महसूस कर,
तन्हाईयां कहती हैं तू अकेला तो नहीं।
तन्हाईयां कहती हैं तू अकेला तो नहीं।
होता हूं जब तन्हाईयों के साये में,
तब तेरी याद आकर मुझमें कुछ यूं ही समा जाती है,
याद और तन्हाईयां मिलकर मुझे बांट लेती हैं
मेरे आंसू और गम कुछ यूं ही छांट देती हैं।
याद और तन्हाईयां मिलकर मुझे बांट लेती हैं
मेरे आंसू और गम कुछ यूं ही छांट देती हैं।
आज तन्हाईयों ने घेरा मुझे,
तेरी यादों के साथ पकड़ा मुझे,
लड़ पड़ी दोनों अपना हक जताने को,
बेचैन खुद में कुछ,
कुछ मुझमें खुद को समाने को।
दोनों ही मुझसे कुछ इस कदर हमनवां हुई जाती हैं,
सांस लेता भी नहीं मैं,
तो भी खींची चली आती यें।
इन दोनों के बीच में मैं,
मैं नहीं रह पाता हूं,
कुछ इन में मैं,
कुछ खुद में ही यूं खो जाता हूं मैं।
कुछ इस कदर मन को तेरे बिन बहलाता हूं मैं।
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