मास्क मुस्कान मौत मुहब्बत
मुस्कान छुपी जो मास्क में तेरी,
हमने भी निगाहों पर निशाना लगाया है,
ये काजल का जो पहरा आंखों पर तुमने बिठाया हैे,
इसी पर हमारा दिल आया है,
चाहे लाख कोशिश करता हूं,
तेरी यादों से बचने के दरमयां,
मेरी सासों के अंतरालों मे,
तू ही तू बस छाया है।
धड़कनें राग में तेरी,
मेरा लहू भी कतरों में तुझ पर ही तो रिझाया है।
आज मौत भी जिंदगी से पूछती हे़ै मेरी,
ये शख्स इतना टूट कर भी किस कदर रह पाया है।
जिंदगी जवाब में बोली,
इसे फनकार ना समझो,
ये मुहब्बत की राख का हमसाया है,
मुक्म्मल जो ना हो सकी दर्द की वो हंसी दास्तां,
इसने दर्द को नहीं, दर्द ने इसको पाला है।
मुक्म्मल जो ना हो सकी दर्द की वो हंसी दास्तां,
इसने दर्द को नहीं, दर्द ने इसको पाला है।
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