बादल
"सुनो"
"क्या?"
"अच्छा रहने दो"
"बोलो ना"
"आज बाल बांधों मत"
"अरे नहीं, फिर वो चेहरे पे आते हैं और कुछ काम नहीं होता,क्यूं ।"
"तभी तो"वो चेहरे पर छा जाते हैं"
वो मुस्कुराया।
आसमान में बादल छा गए थे,
चेहरे पर भी,
और आंखों में मुस्कान महकने लगी थी।
कुछ यूं ही दो दिल सागर से गहरे डूब ऱहे थे।
लहरों से कभी ऊपर कभी नीचे।
👌👌
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