दिल नाव तूफां

 दिल की कसमकस कहां डरती है, ख्वाब सजाने से,

 जिस नदी में तूफान के खतरे का अंदेशा हो,

उस नदी में दिल जरूर नांव डालता है,

और इसकी जांबाजी क्या ही कहूं?

दिलेरी तो बस, तूफानी दरिया में दो नाव तैराने के नुकसान जान कर भी, ये तो बस फुदक पड़ता है  ।

काश दिल को डरा सकते या समझा पाते,

नादानी के आलम में अकसर तूफां में फंस कर जो टूट होती है दिल की उसकी मरम्मत को उस खुदा ने कोई कारीगर ना तैयार किया, खामियाजा ये कि बस वो टूटा दिल, जीवन भर फिर दरिया तो क्या पानी की हलकी बूंद से भी कुछ यूं रूठता है कि बस आंखों में भी उसे ठहरने ना देना चाहता है, ।तूफां का दर्द आंखों से दिल में बस तैरता रहता है।

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