गलतफहमी रक्षाबंधन १

बहुत खुश हुए रक्षाबंधन त्यौहार बिता है "अभि",
बहनों को रक्षा का वादा दिलाया है तभी,
बहनों को रक्षा का वादा दिलाया है तभी,
सच बताना जरा,
 ये त्यौहार हम क्यूं मनाते,
बहन को रक्षा की गलतफहमी जताते,
हां गलतफहमी जताते,
गर होता ये सच,
तो बताना जरा,
कब कहां कैसे करते हो उसकी रक्षा,
गर सच होता ये तो,
क्यूं ,
हां क्यूं,
ईक बहन ,
किसी ना किसी की,
कहीं ना कहीं ,
हर जगह है असु रक्षा के सच में  है जीवन बीताती,
हर दिन जाने कितनी असमत जाती है लूटी,
रात के अंधेरों ही नहीं दिन के उजाले भी,
डर के साये में इक मां अपनी बच्ची को नहीं है निकालती,
क्यूंकि अपनी बहन की जीवनी है तुझको दिखती,
पर जरा बताना,
कहां , कितनी रक्षा भी,
वो 'अपनी' बहन है तुमसे करवाती,
याद करना,
कितने आंसू वो तुम्हे अपने वो दिखाती,
वो उसके ख्वाबों का,वो उसके दिल का टूटना
पंखों की उड़ान का,
 जाने कितने अपनों के रिश्तों का छूटना ।
ना है वो तुम्हे दिखाती,
ना दुःख अपना वो समझाती,
क्यूं,
उसे ये भी है मालूम की,
या तो तुम उसके दर्द से बिखर जाओगे,
या उससे बड़ा डर की तुम 
उस पर जुबां और हथियारों से बिफर जाओगे ।
या उससे बड़ा डर की तुम 
उस पर जुबां और हथियारों से बिफर जाओगे।
हां तब वो दर्द और बढ़ जाएगा,
तुम्हारा सहारा भी उसे ना मिल पाएगा।
तो इस बार कोई गलतफहमी ना दो उसे,
देना है तो इक वादा नहीं, सच देना,
चाहे जो हो किसी बहन के आंसू ना बहने देना
तो इस बार कोई गलतफहमी ना दो उसे,
देना है तो इक वादा नहीं, सच देना,
चाहे जो हो किसी बहन के आंसू ना बहने देना।

Comments

Post a Comment

Popular Posts