किस बात पे इतराता है
धड़कनों को समझाना कुछ मुश्किल सा हुआ जाता है,
भूल जाए उसको ये , किस बात पे इतराता है,
धड़कनों को समझाना कुछ मुश्किल सा हुआ जाता है ।
आज बढ़ी धड़कनें भूकम्प सी लहराती हैं,
याद उसकी दिल में कुछ यूं गहराती हैं,
हर बूंद खून में यूं अंदर समा जाती हैं,
याद उसकी दिल में कुछ यूं गहराती हैं।
ना कोई लॉजिक ना पेन धड़कनों को समझ आता है,
दर्द की लहरों को ये दिल के सागर में लहराता है,
लॉजिक की बातों को दिल से बाहर ये ले जाता है,
धड़कनों को समझाना कुछ मुश्किल सा हुआ जाता है,
भूल जाए उसको ये , किस बात पे इतराता है,
धड़कनों से आज रात झगड़ा सा हुआ जाता है,
लेकर उसकी बातों को ये सीने को क्यूं पिघलाता है,
बनकर आंसूओं की बारिश दिल को क्यूं रूलाता है,
भूलने की बात पर उसको , ये मद्धम सा हो जाता है,
बंद हो जाएंगी धड़कने , ये धमकी सा दे जाता है,
बंद हो जाएंगी धड़कने , ये धमकी सा दे जाता है।
धड़कनों को समझाना कुछ मुश्किल सा हुआ जाता है,
भूल जाए उसको ये , किस बात पे इतराता है,
किस बात पे इतराता है।
*@भि@भि
👍👍👍
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