बन के इंसान

आप खोजिए मंदिरों में भगवान,
वो छुपा आपके सामने बन के इंसान,
देखो गौर से उसका न कोई झगड़ा,
 कभी अल्लाह कभी भगवान,
लड़ते हो आपस में उसे खोज के,
पीटते सर बन के यूं नादान।
वो आता और जाता रहा जीवन में सदा,
देता छत है सिर पर,
जब छाया चारो ओर तूफान।
मदद को मत पुकारो उसे,
वो तुममें होता है बनाता तुम्हे मनसा बलवान।
तुम करोगे अच्छाई इस जग में,
लौट कर आएगी तेरे पास देना बस ध्यान।
आप खोजिए मंदिरों में भगवान,
वो छुपा आपके सामने बन के इंसान।

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