रंग काला की किस्मत पर ताला

रंगों की भी अपनी किस्मत होती है,

रंग गुलाबी सुनते ही खुशनुमा अहसास लाती है,

रंग ये प्रेम की छांव में पलता बढ़ता है,

वो कहते हैं ना प्रेम में हवा भी गुलाबी हो जाती है,

पर रंग काला कैसा बदनाम हो गया है,

अंधेरा , डर और ना जाने कैसे कैसे ख्याल लाता है ।

पर क्या सोचा है कभी,

रंग काला ना होता ,

ये रात उजली होती ,

कमरे में अंधेरा ना होता,

तो क्या सुकून मिलता,

रात के अंधेरे डराते ही नहीं,

आराम करने का समय भी बताते,

उजालों की थकान को तन से ही नहीं,

मन की भी कुछ यूं मिटाते हैं,

ताजगी दे के दोनों को,

नव जीवन की फिर आस दिलाते हैं,

कमरे में अंधेरा कर बैठो तो वो जज्बा समाता है,

भीड़ में खो गया जो,वो तुमको तुम से मिलाता है,

पर देखो इस बदनसीब को कुछ लोगों के गलत कामों से,

ये काला रंग बदनाम हो जाता है ।

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