जाना उसका

 सांसें तेज चल रही थी, होंठ गर्मी में पसीने से भीग गए थे,

हाथ जाड़े की सुबह की तरह ठंडे पड़ गए थे, पैर सीधे ना खड़े होकर कुछ मुड़ते कंपकपाते थे।जून की शाम मौसम के असर से ज्यादा उसके जाने की खबर से तप रहे थे ।रात भर वो वहां बैठा रहा , उसे देखता बिना पलक झपकाए, क्यूंकि वो जान रहा था, ये चेहरा अब शायद कभी ना देख पाए।

हालांकि वादा था साथ , अभि के..वादा कभी अलग ना होने का .. वादे टूटने के लिए ही किए जाते हैं, वादों की दुनिया कितनी रंगीन होती है ना, उतनी ही जितनी मोमबत्ती।

रोशनी की तलाश खुद को जलाकर पूरी होती है,

वादों के चिराग जलते जलते रौशनी तो देते हैं, पर वक्त की मेज पर सुबह वादों की मोम ही बची होती है वो भी आखिरी सांस लेती हुई।

रात के अंधेरे जाते जाते उजालों को वो बची मोम दे जाते हैं,

वादे भी इंसान की नियत और प्रकृति की नियति तले रूप बदल लेते हैं, मोमबत्ती की शख्सियत की तरह वादे सिर्फ निशान बन कर रह जाते हैं ।

वो जा रही , उसकी आंखों ने आंसूओं का साथ छोड़ दिया है।

क्या आंसू भी मोहब्बत की दुनिया से रंग सीखकर बेवफाई पर उतर आते हैं?

या शायद आंसू मुहब्बत की निशानी बन धड़कनों में रक्त की जगह ले बह रहे हैं ।

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