सावन शाम सवाल
सावन की शाम कुछ ज्यादा ही सवाल करती है,
ये सवाल मन के अंधेरों को भी उजाल करती है,
सावन महीने में बारिश का प्रेम ,
नीले आसमां पर काली इबारत लिखने को,
बादलों का इस्तेमाल करती है ।
घने मनमत बादल बारिश की स्याही से,
धरती का सीना भी निहाल करती है ।
मां के मन में बच्चे की तबियत की चिंता,
सोच बारिशों सी बरस बुरा हाल करती है ।
पिता की सांसों में परिवारी पेट की कशिश,
बादलों सा घना काला बवाल करती है ।
पति पत्नी का मन बारिशों से रोमांचित होने के,
नये रास्तों को इकबाल(स्वीकार) करती है ।
प्रेम में डूबे मन को बारिशों बादलों की,
नीले आसमां पर छाने की कल्पना ही निहाल करती है ।
सावन की शाम कुछ ज्यादा ही सवाल करती है,
ये सवाल मन के अंधेरों को भी उजाल करती है,
Nice
ReplyDeleteThank you
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