मां और आंधी तूफान
आंधी और तूफान ,
मेरी जिंदगी की धरती पर आते रहते रहे..
जी हां जाते नहीं रहते रहे,
ये कभी हल्का झकझोरने जैसा नहीं,
बस जोरदार ...
सालों तक असर बनाने वाले आंधी और तूफान ।
मुझे सब याद हैं,
फिर कभी उनसे रूबरू कराउंगा,
आज इक और ही दास्तां है,
जिसको बिना रोए आप तक पहुंचाऊंगा।
ना जाने कब इस तूफां के निशां मिट पाएंगे,
या शायद जिंदगी जाने तक ये बने ही रह जाएंगे।
थी इक तारिख अगस्ते महिना था,
थी दस दिनों की कसमकस,
वो सावन का ही महिना था,
तुम बिस्तर की आड़ मे आंसू छुपाए पड़ी थी,
ना हिलना ना डूलना,
सांसों का बस चलना था।
धड़कनों का अपनी मरजी में बहना,
कुछ सुनना पर कुछ ना कहना था।
आंखों के दरमयां समुदर का रहना,
विदा के पहले,
मेंहदीं का जैसे हाथों मे खिलना था।
हां,मुझे है याद तेरा आखिरी बार,
भरोसे से "चंदन" चंदन" कहना था।
डाक्टर के आगे तेरा वो चीखना,
जिसे सुनकर दूं जवाब,
पर मेरा तेरे वास्ते,चुप करना था।
बस... थी इक आस,
की तू आएगी मेरे पास,
आंखों में इन यांदों का यूं रसना था।
सब तो याद है मां,
क्या है कुछ जो ना कहूं,
पापा का आई सी यू के दरवाजों पर वो बिलखना था।
सोता था उन दिनों , इस आस में,
कि लौट आओगी तुम सूना तेरे बिन घर का अंगना था।
रोज बातें करने का देखती रहीं,
मेरी आंखें जैसे दिन रात ये ही सपना था।
पर ना मंजूर इन आंधी और तूफान को,
मेरी किस्मत में तेरा सजना था।
सुबह की किरन लाती थी उजालों कों,
संसार की यही रीत इश्वर को यही रचना था।
आया वो भी दिन ,चाहता था कभी हो,
जिससे सदा मुझे बचना था।
मगर देखो ना मां,
ले आई उस सुबह जिसे कहते किस्मत में क्या यही घटना था।
तुम जा चुकी थी रूठकर ,
खाली घरौंदा छोड़कर,
काश कोई कहता कि ये है झूठ ये सच ना था
काश कोई कहता कि ये है झूठ ये सच ना था।
अब क्या लिखूं आगे बहुत,
कांपते हाथ और आंसूओ से सजी काश होता ना सच इसे ये सिर्फ रचना था
लिखूं क्या आगे।
May god bless uhh and may her soul rest in peace❤
ReplyDeleteAameen
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