Barish

बारिशों के अपने सवाल हैं,
ये ना बरसें तो बवाल हैं,
और बरसें जो जोर से तो भी करतीं ये धमाल हैं।

जी भर के जी लो बारिशों को,
ये बारिशों का शोर दिल की घड़कन ही है।
कहीं खामोशी के आगोश में चुप होकर,
अफसोस का बादल ना बन जाए।
फिर सिर्फ इंतजार ही रह जाता है ,लम्बा और बेदर्द इंतजार । । ।
~ अभि

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