आँखों से दिल की दूरी
कुछ आँखों से दिल की दूरी आसां नहीं,
कितने ही होंठो की नाफरमानी से नाकाम हुए जाते हैं..
पर जिन्होंने तय की ये दूरियाँ वो भी कहां..
सफर में हमसफर रह पाते हैं..
छूट कर बिछड़ने पर..
दूरियाँ दिलों के दरमियाँ कहाँ कब कितनी जगह पाती हैं
प्यार के हमसफर..
हमसफर की याद में थम जाते हैं..
पैरों से किलोमीटर की दूरियाँ कब दिल की दूरियों में तब्दील हुई जाती है..
थमती हैं धड़कने तब भी दिल से धड़कन की इस सांस से उस सांस के दरमियाँ देख ही लेते हैं उन्हें..
करवटें बदलते हुए..
शायद इसीलिए आँखों से दिल की दूरी आसां तो नहीं..
कभी कभी जिंदगी भर साथ चल के भी ये दूरियाँ कहाँ ख़तम हो पाती हैं
👌👌👌
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