कुछ थमा सा
कंपकंपाते होंठ..
बढ़ी धड़कने...
थरथराते हाँथ..
आगे कभी पीछे..
साँसों का चढ़ना.. उतरना..
दिल का गहरे डूब जाना..
कुछ कह पाना.. कुछ ना कह पाने पर भारी पड़ता है कभी कभी..
कह देना नहीं कह पाना... कस मा कस से निकल पाना..
आसान कहाँ होता..
काश कह देता तो...
उफ्फ्फ..
अच्छा है ना कहना..
कहीं वो रूठ गया तो...
बेहतर है ना..
ऐसे दो स त बने रहे...
उम्र के इस पड़ाव से हर कोई गुजरता है ना...
यही तो है कुछ अनकही..
हम मे थमी..
Beautiful ❤
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