दिल और आंसू 4
धड़कन औऱ आंसुओ में इक दौड़ लगी थी आज,
जीतने की आस आसां ना रही..
किसी की हार बर्दास्त ए काबिल ना रही ..
धड़कनों की हार मौत को बूलाती रही,
आंसुओ की हार धड़कनों को रोक सकती रही. .
धड़कनों की हार का हाल भी कुछ जुदा ना रहा ..
कीमत क्या थी"जान",
ये जान कर भी दौड़ जारी और
जरूरी
क्यूँ रही..
दिल के आंसुओं की अहमियत कुछ यूँ जुदा सी रही..
सलामती इनकी कुछ यूँ जज़्बात से होती रही..
प्रेम ही नहीं नफरतें भी इनकी वजह क्यूँ रही..
धड़कन औऱ आंसुओ में इक दौड़ लगी थी आज
जीतने की आस आसां ना रही..
👍👍
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